इतिहास

ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि

श्री ओम प्रकाश त्यागी के कुशल नेतृत्व में आर्य वीर दल ने पूरे देश में विकास किया ।१९४२ में ४०० आर्य वीरों का विशाल शिविर बदरपुर , नई दिल्ली में लगा । उन्हीं दिनों पूरा राष्ट्र पूर्ण स्वराज्य की लडाई में जुटा हुआ था हैदराबाद मुक्ति संग्राम के दौरान तीन आर्य वीरों ने निजाम की कार पर बम फेंकने की योजना बनायी । दुर्भाग्य से बम समय पर नहीं फटा , उन तीनों में से श्री नारायणराव को पकड. लिया गया और उन्हें फांसी लगाने की घोषणा की गयी । घोर प्रताडना के बाद भी श्री नारायणराव ने आर्य वीर दल के बारे में एक शब्द नहीं कहा ! कुछ समय बाद “द बैंक आफ निजाम ’’ से आर्य वीरों ने तीस लाख रुपये लूटे जो उन्होंने भारत के गृह मन्त्री सरदार बल्लभ भाई पटेल और आर्य नेता श्याम लाल जी को भेंट कर दिये ।

हैदराबाद के मुक्ति संग्राम में श्री वेदप्रकाश , श्री किरन राय और अनेकों आर्य वीरों ने अपने जीवन की आहुति दे दी । उस समय के गृहमंत्री सरदार पटेल ने कहा, यदि “आर्य समाज और आर्य वीरों का सहयोग नहीं होता तो हैदराबाद पर विजय पाना असंभव था ‘’ इस रियासत की विजय का श्रेय आर्य वीरों को जाता है ।”

१९३६ में मध्य भारत में अकाल के फैल जाने पर उज्जैन ,झाबुआ ,दोहद और मेघनगर में राहत केन्द्र आर्य वीर दल ने खोल कर पीडित लोगों की सेवा की । यह केन्द्र ५० दिनों तक चलते रहे ।
१९४२ में बंगाल में सूखा और अकाल पड गया जिसमें लगभग ४५ लाख लोग मरे ।,सार्व देशिक और पंजाब सभा के संयुक्त उपक्रम द्वारा आर्य वीर दल के नेतृत्व में भोजन , दवाएं ,कपडे पीडितों में बांटे गये । भारत के बंटवारे के समय आर्य वीरों ने पीडितों की सहायता की । गुजरात में भूचाल ,सूरत में प्लेग और सूनामी के समय में स्वामी देवव्रत संचालक के नेतृत्व में आर्य वीर दल सेवा व सहायता कार्य में जी जान से लगा रहा ।

 
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