हमारे बारे में

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बीसवीं शताब्दी के अग्रणी समाज सुधारक और सर्व प्रथम स्वराज्य की मांग करने वाले महान सन्त महर्षि दयानन्द सरस्वती ने शताब्दियों से फैले अज्ञान , अन्धकार के विरुद्ध और वैदिक मन्तव्यों की स्थापना के लिए सत्यार्थ प्रकाश नामक अद्भुत ग्रंथ लिखा और इसके माध्यम से नव युग की क्रान्ति का शुभारम्भ किया । परिणाम स्वरूप पूरी दुनियां के लोग जागरूक हुए । लेकिन कुछ मतावलम्बी एवं स्वार्थी लोग आर्य समाज की गतिविधियों से ईर्ष्या करने लगे । आर्य समाज के प्रखर विद्वान और प्रचारकों जैसे पं. लेखराम और स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या कर दी गई साथ ही आर्य समाज के कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले भी होने लगे ।

२३ दिसम्बर १९२६ को स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या की गयी । सन १९२७ में महात्मा हंसराज के नेतृत्व में एक विशाल आर्य सम्मेलन हुआ , जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि एक विशेष समर्पित शक्ति की स्थापना की जाय जिसके द्वारा आर्य नेताओं, सम्पतियों ,गतिविधियों और आर्य समाजों की सुरक्षा की जा सके । इस प्रकार महात्मा नारायण स्वामी की अध्यक्षता में २६ जनवरी १९२९ ‘’ आर्य रक्षा समिति’’ के सुदृढ अंग के रूप में आर्य वीर दल की स्थापना की गयी । इसके प्रधान संचालक एक साहसी व्यक्ति श्री ओम प्रकाश त्यागी को बनाया गया । आर्य रक्षा समिति को १० हजार रुपये और १० हजार लोगों को इकट्ठा करने का लक्ष्य दिया गया । समिति ने दस हजार युवक और निर्धारित धन समय से पूर्व ही इकट्ठा कर दिया ।

ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि

 
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