॥ओ३म्॥

आर्य वीर दल का परिचय

आर्य वीर दल आर्य समाज के ऐसे युवक और युवतियों ( वीर और वीरांगनाओं ) का सक्षम संगठन है जोः-

1. वैदिक मूल्यों के आधार पर जीवन यापन करते हैं ।

2. नैतिक ,वैचारिक ,और शारीरिक रूप से अत्यन्त सबल एवं स्वस्थ होते हैं ।

3. हर समय स्वाभिमान एवं देश भक्ति की भावना के साथ सम्पूर्ण प्राणी जगत के उत्थान के लिए प्रयत्नशील रहते हैं ।

प्राकृतिक विपदाओं जैसे बाढ., सूखा ,महामारी ,भूकम्प आदि के समय जिस शीघ्रता और तन्मयता से आर्य वीर दल राहत कार्य में लग जाता है वह जगत विख्यात है ।
ये वीर - वीरांगनाएं सेवा कार्य में तन , मन और धन से जुट जाते हैं । सेवा और देश प्रेम इनकी रगों में प्रवाहित होता रहता है ।

आर्य वीर दल तीन शब्दों के योग से बना है जिनका अर्थ निम्न प्रकार से हैः-


आर्य – यह शब्द संस्कृत की ऋ गतौ धातु से बना है । इसका अर्थ है गति करना। प्रगतिशील व्यक्ति को ही आर्य कहते हैं ।


वीर – वीर शब्द वि क्रान्तौ धातु से बना है । जो व्यक्ति पराक्रमी हो, जिसे देखकर शत्रु भयभीत होकर कांपने लगे उसे ‘वीर ’ कहते हैं । (आर्य वीर दल की युवतियों को

वीरांगना कहते हैं )

 


दल –‘दल ’ शब्द दलनार्थक ‘दल्’ धातु से बना है । दल शब्द संगठन का वाचक है।

इस प्रकार आर्य वीर दल शब्द का अर्थ हुआ श्रेष्ठ,चरित्रवान वीरों का संगठन

 

आर्य वीर और वीरांगनाओं में बुद्धि बल,ब्रह्म शक्ति और क्षात्र शक्ति का समावेश तथा उत्कृष्ट अनुशासन होना अनिवार्य है ।


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